Law4u - Made in India

भारत में तलाक के मुख्य आधार क्या हैं?

09-Oct-2026
तलाक

Answer By law4u team

भारत में विवाह विच्छेद यानी तलाक के कानूनी प्रावधान विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों द्वारा शासित होते हैं, जो पति और पत्नी के धर्म पर निर्भर करते हैं। मुख्य रूप से हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (HMA) के तहत हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म के लोगों के लिए तलाक के नियम तय किए गए हैं, जबकि अन्य धर्मों के लिए अलग कानून हैं। भारत में विवाह को एक पवित्र बंधन माना जाता था, लेकिन आधुनिक कानूनों में पति-पत्नी के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए तलाक के कई स्पष्ट आधार दिए गए हैं। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत कोई भी पक्षकार, चाहे वह पति हो या पत्नी, न्यायालय में तलाक की याचिका दायर कर सकता है। इसके मुख्य आधारों में क्रूरता सबसे प्रमुख है। यदि विवाह के बाद दूसरे पक्ष ने याचिकाकर्ता के साथ शारीरिक या मानसिक रूप से ऐसा क्रूर व्यवहार किया है जिससे उसके जीवन को खतरा पैदा हो जाए या उसके मन में गंभीर भय उत्पन्न हो जाए, तो इसे क्रूरता माना जाता है और यह तलाक का मजबूत आधार बनता है। व्यभिचार यानी एडल्ट्री भी तलाक का एक अन्य महत्वपूर्ण आधार है। यदि विवाह के बाद किसी भी पक्षकार ने अपने जीवनसाथी को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ स्वेच्छा से शारीरिक संबंध बनाए हैं, तो दूसरा पक्ष इसके आधार पर तलाक मांग सकता है। हालांकि, पहले भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) के तहत एडल्ट्री एक आपराधिक अपराध था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद इसे अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया, परंतु यह अभी भी पारिवारिक कानून के तहत तलाक का वैध आधार बना हुआ है। त्याग यानी डिज़र्टेशन भी तलाक का एक आधार है। यदि किसी जीवनसाथी ने बिना किसी उचित कारण और बिना किसी पूर्व सहमति के लगातार कम से कम दो साल की अवधि के लिए याचिकाकर्ता को छोड़ दिया है या उससे दूरी बना ली है, तो इसे परित्याग माना जाता है और इसके आधार पर अदालत में तलाक की अर्जी दी जा सकती है। मानसिक विकार या पागलपन भी तलाक का एक अन्य आधार है। यदि प्रतिवादी लगातार या रुक-रुक कर ऐसे मानसिक विकार से पीड़ित है जो इस स्तर का है कि याचिकाकर्ता से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह उसके साथ रहे, तो तलाक की मांग की जा सकती है। इसके अलावा, यदि कोई पक्षकार किसी ऐसे लाइलाज और गंभीर संक्रामक रोग से पीड़ित है, जिसके बारे में दूसरे साथी को जानकारी नहीं थी, तो यह भी कानूनन तलाक का आधार बनता है। सिविल मृत्यु या संन्यास लेना भी तलाक का एक आधार है। यदि किसी व्यक्ति ने दुनियादारी और पारिवारिक जीवन छोड़कर पूरी तरह से संन्यास ले लिया है और किसी धार्मिक आदेश के तहत संत या सन्यासी बन गया है, और पिछले सात वर्षों या उससे अधिक समय से उसका कोई अतापता नहीं है या उसकी जीवित होने की कोई खबर नहीं मिली है, तो इसे कानून की नजर में मृत मानकर तलाक लिया जा सकता है। महिलाओं के लिए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 (2) के तहत कुछ विशेष और अतिरिक्त आधार भी दिए गए हैं। यदि किसी पति ने अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह कर लिया है, या यदि पति भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत बलात्कार, sodomy या bestiality जैसे अपराधों का दोषी पाया गया है, तो पत्नी तुरंत तलाक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। इसके अलावा, यदि शादी के समय पत्नी की उम्र पंद्रह वर्ष से कम थी और उसने अठारह वर्ष की आयु होने से पहले विवाह को अस्वीकार कर दिया है, तो वह भी तलाक की हकदार है। पारस्परिक सहमति से तलाक भी भारत में बहुत आम और कानूनी रूप से मान्य तरीका है। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 बी के तहत यदि पति और पत्नी दोनों इस बात पर सहमत हैं कि वे अब साथ नहीं रह सकते और उनके बीच मतभेद सुलझने योग्य नहीं हैं, तो वे संयुक्त रूप से अदालत में आपसी सहमति से तलाक के लिए याचिका दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें आमतौर पर छह महीने की कूलिंग पीरियड या प्रतीक्षा अवधि दी जाती है, जिसके बाद अदालत अंतिम आदेश पारित करती है। अन्य धर्मों की बात करें तो, मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत पति मौखिक या लिखित रूप में तलाक दे सकता है, जबकि महिलाओं के लिए विघटन मुस्लिम विवाह अधिनियम, 1939 (Dissolution of Muslim Marriages Act, 1939) के तहत क्रूरता, पति के लापता होने, वित्तीय सहायता न मिलने या नपुंसकता जैसे आधारों पर खुला या न्यायिक तलाक लेने का अधिकार है। इसी तरह ईसाई धर्म के लोगों के लिए भारतीय तलाक अधिनियम, 1862 लागू होता है, और पारसी तथा विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत भी अलग-अलग समुदायों के लिए विशिष्ट तलाक के नियम और आधार तय किए गए हैं। अंततः, किसी भी मामले में तलाक की प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्थानीय पारिवारिक न्यायालय में उचित दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने होते हैं, जहां न्यायाधीश सभी पहलुओं की जांच करने के बाद अंतिम फैसला सुनाते हैं।

तलाक Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Rajesh Kumar Rai

Advocate Rajesh Kumar Rai

Cheque Bounce, Divorce, Insurance, Family, Motor Accident

Get Advice
Advocate Kallepalli Srinivasa Rao

Advocate Kallepalli Srinivasa Rao

Anticipatory Bail, Arbitration, Armed Forces Tribunal, Banking & Finance, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Corporate, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Domestic Violence, Family, High Court, Revenue

Get Advice
Advocate Diksha Bhaskar

Advocate Diksha Bhaskar

Anticipatory Bail, Arbitration, Bankruptcy & Insolvency, Banking & Finance, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Corporate, Customs & Central Excise, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Family, Domestic Violence, Documentation, High Court, Immigration, Insurance, International Law, Landlord & Tenant, Labour & Service, Media and Entertainment, Medical Negligence, Motor Accident, Muslim Law, NCLT, Patent, Property, Supreme Court, R.T.I, Recovery, RERA, Startup, Succession Certificate, Wills Trusts, Trademark & Copyright, Revenue, Tax

Get Advice
Advocate Manikandan S

Advocate Manikandan S

Cheque Bounce, Civil, Criminal, Divorce, Muslim Law

Get Advice
Advocate Md Zeeshan Ansari

Advocate Md Zeeshan Ansari

High Court, Motor Accident, Cyber Crime, Anticipatory Bail, Criminal

Get Advice
Advocate Anand Mani Tripathi

Advocate Anand Mani Tripathi

Bankruptcy & Insolvency,Breach of Contract,Corporate,Criminal,Cyber Crime,GST,Tax,Trademark & Copyright,

Get Advice
Advocate Dafrenj Jolhe

Advocate Dafrenj Jolhe

Revenue, Criminal, Domestic Violence, Civil

Get Advice
Advocate Shivam Kumar Mishra

Advocate Shivam Kumar Mishra

Anticipatory Bail, Arbitration, Cheque Bounce, Motor Accident, Property

Get Advice
Advocate Sujeet Rajkumar Singh

Advocate Sujeet Rajkumar Singh

Anticipatory Bail, Arbitration, Child Custody, Cheque Bounce, Breach of Contract, Civil, Court Marriage, Cyber Crime, Divorce, Domestic Violence, Landlord & Tenant, Labour & Service, Family, Medical Negligence, Motor Accident, Media and Entertainment, Property, R.T.I, Recovery, RERA, Succession Certificate, Trademark & Copyright, Revenue

Get Advice

तलाक Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.