Law4u - Made in India

इंटरनेशनल लॉ भारतीय सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को कैसे प्रभावित करता है?

Answer By law4u team

अंतरराष्ट्रीय कानून और भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के संबंधों का अध्ययन भारतीय संवैधानिक ढांचे, वैधानिक व्याख्या और वैश्विक न्यायशास्त्र के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय न्यायपालिका ने समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय संधियों, सम्मेलनों और प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून को घरेलू कानून में शामिल करने और उनकी व्याख्या करने के लिए एक विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 के तहत राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि राज्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा, राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानजनक संबंधों को बनाए रखेगा, संगठित लोगों के आपसी व्यवहार में अंतरराष्ट्रीय कानून और संधि के दायित्वों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ाएगा और अंतरराष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटाने के लिए प्रोत्साहन देगा। यह संवैधानिक प्रावधान इस बात का मूल आधार प्रदान करता है कि क्यों भारतीय सर्वोच्च न्यायालय अंतरराष्ट्रीय कानून से प्रभावित होता है और उसे अपने निर्णयों में स्थान देता है। भारतीय कानूनी प्रणाली में दो प्रमुख सिद्धांत काम करते हैं, जिन्हें द्वैतवाद और एकरूपता के रूप में जाना जाता है। पारंपरिक रूप से भारत एक द्वैतवादी देश है, जिसका अर्थ है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तब तक घरेलू अदालतों में स्वतः लागू नहीं होता जब तक कि संसद द्वारा उसे अधिनियमित न किया जाए। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस सिद्धांत में एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील लचीलापन दिखाया है। न्यायालय ने यह माना है कि यदि कोई घरेलू कानून किसी अंतरराष्ट्रीय संधि के विपरीत नहीं है, या यदि किसी कानून में कोई अस्पष्टता है, तो उसकी व्याख्या अंतरराष्ट्रीय संधियों और संवहेदों के अनुकूल की जानी चाहिए। इसका सबसे प्रमुख उदाहरण मानवाधिकारों के क्षेत्र में देखा जाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की व्याख्या का दायरा बढ़ाने के लिए यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स और इंटरनेशनल कोवेनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स जैसे अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया है। जब भी न्यायालय को यह महसूस होता है कि घरेलू कानून किसी अंतरराष्ट्रीय दायित्व को पूरा करने में मौन है या अपर्याप्त है, तो वह अंतरराष्ट्रीय कानून को घरेलू कानून में समाहित करने के लिए न्यायिक सक्रियता का सहारा लेता है। विशाखा बनाम राजस्थान राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करते समय कन्वेंशन ऑन द एलिमिनेशन ऑफ़ ऑल फॉर्म्स ऑफ़ डिस्क्रिमिनेशन अगेंस्ट वुमेन के प्रावधानों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया और उन्हें तब तक के लिए कानून का दर्जा दिया जब तक कि संसद ने इस पर कोई विशिष्ट कानून नहीं बनाया। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण कानून के क्षेत्र में सर्वोच्च न्यायालय ने सतत विकास के सिद्धांत, एहतियाती सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान करेगा सिद्धांत को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से उधार लिया है। स्टॉकहोम घोषणा और रियो घोषणा जैसे अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों ने भारतीय पर्यावरण न्यायशास्त्र को आकार देने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। न्यायालय ने यह माना है कि भारत द्वारा हस्ताक्षरित अंतरराष्ट्रीय संधियाँ, भले ही उन्हें घरेलू कानून में अधिनियमित न किया गया हो, यदि वे देश के मौलिक अधिकारों के विपरीत नहीं हैं, तो उन्हें भारतीय कानून का एक अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए। शरणार्थियों के अधिकार, कैदियों के अधिकार, और निजता के अधिकार जैसे मामलों में भी न्यायालय ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानदंडों का बार-बार हवाला दिया है। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून और आतंकवाद के मामलों में भी सर्वोच्च न्यायालय वैश्विक संधियों और सम्मेलनों से मार्गदर्शन प्राप्त करता है। प्रत्यर्पण मामलों, समुद्री कानून, और कूटनीतिक प्रतिरक्षा जैसे मामलों में न्यायालय अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून का पूरी तरह से पालन करता है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय कानून भारतीय संविधान के बुनियादी ढांचे या संसद द्वारा बनाए गए किसी स्पष्ट कानून को ओवरराइड नहीं कर सकता है। यदि संसद ने कोई ऐसा कानून बनाया है जो किसी अंतरराष्ट्रीय संधि के विपरीत है, तो भारतीय अदालतों के लिए घरेलू कानून सर्वोपरि रहेगा। संक्षेप में, अंतरराष्ट्रीय कानून भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों को सीधे तौर पर बाध्यकारी रूप से नहीं, बल्कि एक प्रेरक शक्ति और व्याख्यात्मक उपकरण के रूप में गहराई से प्रभावित करता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Mantu Mahato

Advocate Mantu Mahato

Civil, Cheque Bounce, Consumer Court, Criminal, Domestic Violence, Cyber Crime, Divorce, Anticipatory Bail, Court Marriage, Muslim Law, Family, Breach of Contract

Get Advice
Advocate Ashutosh Shukla

Advocate Ashutosh Shukla

Criminal, Civil, Cheque Bounce, Court Marriage, Domestic Violence, Divorce, Family, Motor Accident, Muslim Law, Succession Certificate, Startup, Property, Recovery, Anticipatory Bail

Get Advice
Advocate Vishwashree

Advocate Vishwashree

Criminal,Family,Divorce,Domestic Violence,Anticipatory Bail,Civil,

Get Advice
Advocate Vishal Panwar

Advocate Vishal Panwar

Anticipatory Bail, Banking & Finance, Civil, Consumer Court, High Court

Get Advice
Advocate Pushkraj Chejara

Advocate Pushkraj Chejara

Anticipatory Bail, Domestic Violence, High Court, Divorce, Criminal, Cheque Bounce, Civil, Cyber Crime, Labour & Service

Get Advice
Advocate E Venugopal

Advocate E Venugopal

Criminal, Cheque Bounce, Civil, Family, Divorce

Get Advice
Advocate Umanath Dash

Advocate Umanath Dash

Divorce, Family, Civil, Criminal, Tax, Corporate, Cheque Bounce, Banking & Finance, Property, RERA, GST, R.T.I, Anticipatory Bail, High Court, Startup, Revenue

Get Advice
Advocate Ankalla Prudhvi Raj

Advocate Ankalla Prudhvi Raj

Anticipatory Bail, Arbitration, Armed Forces Tribunal, Bankruptcy & Insolvency, Banking & Finance, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Corporate, Court Marriage, Customs & Central Excise, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, GST, Domestic Violence, Family, High Court, Immigration, Insurance, International Law, Labour & Service, Landlord & Tenant, Media and Entertainment, Medical Negligence, Motor Accident, Muslim Law, NCLT, Patent, Property, R.T.I, Recovery, RERA, Startup, Succession Certificate, Supreme Court, Tax, Trademark & Copyright, Wills Trusts, Revenue

Get Advice
Advocate Venugopal

Advocate Venugopal

Cheque Bounce,Civil,Breach of Contract,Consumer Court,Court Marriage,Divorce,Documentation,Domestic Violence,Family,Landlord & Tenant,Property,R.T.I,Succession Certificate,

Get Advice

अंतरराष्ट्रीय कानून Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.