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क्या कोर्ट मैरिज को कपल के होम स्टेट के बाहर रजिस्टर किया जा सकता है?

Answer By law4u team

भारत में कोर्ट मैरिज के पंजीकरण के संबंध में कानूनी स्थिति यह है कि सामान्यतः विवाह का पंजीकरण उस क्षेत्र के विवाह अधिकारी या मैरिज रजिस्ट्रार के समक्ष किया जाता है जिसके अधिकार क्षेत्र में पिछले कम से कम तीस दिनों से विवाह करने वाले पक्षकारों में से कोई एक सामान्य रूप से निवास कर रहा हो। स्पेशल मैरिज एक्ट, 1955 (Special Marriage Act, 1955) के प्रावधानों के अनुसार, विवाह की नोटिस उसी जिले के मैरिज ऑफिसर को दी जानी चाहिए जहाँ कम से कम एक पक्षकार नोटिस देने की तिथि से ठीक पहले कम से कम तीस दिनों से रह रहा हो। इसका मतलब यह है कि अगर आप अपने होम स्टेट यानी गृह राज्य से बाहर किसी अन्य राज्य या जिले में जाकर कोर्ट मैरिज करना चाहते हैं, तो आप सीधे तौर पर अपने होम स्टेट के पते पर किसी दूसरे राज्य में पंजीकरण नहीं करवा सकते, जब तक कि आप उस नए राज्य या जिले में कानूनी रूप से निवास नहीं करने लग जाते। यदि कोई कपल अपने होम स्टेट से बाहर कोर्ट मैरिज करना चाहता है, तो उसे उस नए राज्य या जिले के स्थानीय निवास प्रमाण पत्र या पते की आवश्यकता होती है। स्पेशल मैरिज एक्ट, 1955 के तहत यह जरूरी है कि मैरिज ऑफिसर के समक्ष आवेदन करने से पहले पक्षकारों में से कम से कम एक व्यक्ति उस विशेष जिले का निवासी हो। यदि आप किसी दूसरे राज्य में नौकरी, व्यवसाय या पढ़ाई के सिलसिले में रह रहे हैं और आपके पास वहां का वैध स्थानीय पता प्रमाण जैसे कि आधार कार्ड, बिजली का बिल, रेंट एग्रीमेंट या बैंक पासबुक है, तो आप उस नए राज्य के संबंधित मैरिज रजिस्ट्रार के कार्यालय में जाकर कोर्ट मैरिज के लिए आवेदन कर सकते हैं और अपना विवाह पंजीकृत करवा सकते हैं। इस प्रक्रिया में सबसे पहले दोनों पक्षों को निर्धारित फॉर्म में एक नोटिस संबंधित मैरिज ऑफिसर को देना होता है। इस नोटिस को मैरिज ऑफिसर अपने कार्यालय के एक दृश्यमान स्थान पर चस्पा करता है ताकि यदि किसी को इस विवाह पर कोई आपत्ति हो, तो वह तीस दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करा सके। यदि निर्धारित तीस दिनों की अवधि के भीतर कोई वैध कानूनी आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, तो मैरिज ऑफिसर दोनों पक्षों और तीन गवाहों को अपने कार्यालय में बुलाता है। सभी पक्षों और गवाहों द्वारा घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद, मैरिज ऑफिसर विवाह का पंजीकरण कर देता है और विवाह प्रमाण पत्र जारी कर देता है। यदि कोई कपल अपने होम स्टेट में ही रजिस्टर्ड मैरिज करना चाहता है लेकिन वर्तमान में दूसरे राज्य में रह रहा है, तो उनके पास यह विकल्प होता है कि वे अपने होम स्टेट वापस जाकर वहां के स्थानीय मैरिज रजिस्ट्रार के समक्ष अपनी शादी संपन्न करवाएं। इसके अलावा, यदि विवाह पहले ही किसी अन्य रीति-रिवाज से संपन्न हो चुका है, जैसे कि मंदिर में या पारंपरिक तरीके से, तो हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) या स्पेशल मैरिज एक्ट, 1955 के अंतर्गत उस पहले से हुए विवाह का पंजीकरण भी उसी स्थान पर कराया जा सकता है जहाँ विवाह संपन्न हुआ था या जहाँ पति या पत्नी में से कोई एक निवास करता है। इस प्रकार, होम स्टेट के बाहर कोर्ट मैरिज करने की कानूनी अनुमति केवल तभी मिलती है जब आप उस नए स्थान पर तीस दिन की निवास शर्त को पूरा करते हैं और आपके पास वहां का वैध निवास प्रमाण हो।

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