Law4u - Made in India

अगर पुलिस गलत व्यक्ति को गिरफ्तार कर ले तो क्या होगा?

24-Sep-2026
आपराधिक

Answer By law4u team

यदि पुलिस किसी गलत व्यक्ति को गिरफ्तार कर लेती है, तो यह भारतीय कानून के तहत एक गंभीर उल्लंघन माना जाता है क्योंकि इससे नागरिक के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन होता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा वंचित नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति को यह अधिकार है कि उसे उसकी गिरफ्तारी के कारणों की तुरंत जानकारी दी जाए और उसे अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने का अधिकार हो। गलत गिरफ्तारी की स्थिति में कानून में कई सुरक्षा उपाय और कानूनी उपचार उपलब्ध हैं। जब पुलिस किसी निर्दोष या गलत व्यक्ति को गिरफ्तार करती है, तो सबसे पहले उस व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्यों को तुरंत सक्षम अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी Habeas Corpus रिट याचिका दायर करनी चाहिए। यह याचिका उच्च न्यायालय यानी High Court या उच्चतम न्यायालय यानी Supreme Court के समक्ष दायर की जा सकती है, जिसके तहत अदालत पुलिस को आदेश देती है कि वे उस व्यक्ति को अदालत के सामने पेश करें और बताएं कि उसे किस आधार पर हिरासत में रखा गया है। यदि अदालत को यह प्रतीत होता है कि गिरफ्तारी अवैध या गलत है, तो अदालत तुरंत उस व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दे सकती है। इसके अतिरिक्त भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 35 (जो पहले कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर यानी CrPC की धारा 41 थी) के तहत पुलिस अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना वारंट के किसी भी व्यक्ति को मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं कर सकते। यदि कोई पुलिस अधिकारी बिना किसी ठोस सबूत या उचित कारण के किसी गलत व्यक्ति को गिरफ्तार करता है, तो उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच बैठ सकती है और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धाराओं के तहत गलत तरीके से बंधक बनाने या अवैध हिरासत में रखने के लिए लोक सेवकों पर आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है। गलत गिरफ्तारी का शिकार हुआ व्यक्ति राज्य सरकार या संबंधित पुलिस विभाग के खिलाफ मुआवजे यानी compensation के लिए दीवानी अदालत यानी Civil Court में मुकदमा दायर कर सकता है। भारतीय न्यायपालिका ने कई महत्वपूर्ण मामलों में यह स्पष्ट किया है कि यदि राज्य के मशीनरी यानी पुलिस प्रशासन द्वारा किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन किया जाता है, तो राज्य हर्जाना देने के लिए उत्तरदायी है। इसके अलावा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) या राज्य मानवाधिकार आयोग के पास भी इस तरह की अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जो मामले की जांच करके पीड़ित को मुआवजा दिलाने की सिफारिश कर सकती है। यदि पुलिस ने किसी व्यक्ति को गलतफहमी या गलत पहचान के आधार पर गिरफ्तार कर लिया है, तो मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के दौरान तुरंत यह तथ्य रखना चाहिए। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के प्रावधानों के तहत जब पुलिस किसी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करती है, तो मजिस्ट्रेट यह जांच करते हैं कि गिरफ्तारी वैध है या नहीं। यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति वह अपराधी नहीं है जिसकी तलाश थी या उस पर लगाए गए आरोप निराधार हैं, तो मजिस्ट्रेट उसे तुरंत पुलिस हिरासत से मुक्त करने का आदेश दे सकते हैं। अंत में, गलत गिरफ्तारी के मामले में पीड़ित व्यक्ति को घबराने की आवश्यकता नहीं होती बल्कि उसे अपने कानूनी अधिकारों का पूरी दृढ़ता से उपयोग करना चाहिए। व्यक्ति को तुरंत अपने वकील के माध्यम से जमानत के लिए या अवैध हिरासत को चुनौती देने के लिए आवेदन करना चाहिए। भविष्य में न्याय पाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि गिरफ्तारी के समय की सभी परिस्थितियों, पुलिस अधिकारियों के नाम, समय और स्थान का पूरा विवरण लिखित रूप में सुरक्षित रखा जाए ताकि कानूनी कार्यवाही के दौरान इसे पुख्ता सबूत के तौर पर अदालत के सामने पेश किया जा सके और गलत कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकें।

आपराधिक Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Gaddam Raghavendra

Advocate Gaddam Raghavendra

Anticipatory Bail, Bankruptcy & Insolvency, Cheque Bounce, Civil, Consumer Court, Criminal, Divorce, Domestic Violence, Family, Motor Accident, Succession Certificate

Get Advice
Advocate Ankit Sharma

Advocate Ankit Sharma

Anticipatory Bail, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, High Court

Get Advice
Advocate Sonia Sharma

Advocate Sonia Sharma

Anticipatory Bail, Civil, Criminal, Divorce, Domestic Violence, Family, High Court, Recovery, Arbitration, Breach of Contract, Corporate, Court Marriage, Documentation, Cyber Crime, Consumer Court, Cheque Bounce, Armed Forces Tribunal, Banking & Finance, Bankruptcy & Insolvency, Child Custody, Insurance, Motor Accident, NCLT, Patent, R.T.I, Succession Certificate, Trademark & Copyright, Revenue, Property

Get Advice
Advocate Ashish Singh

Advocate Ashish Singh

Anticipatory Bail, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, High Court

Get Advice
Advocate Umesh Nanda

Advocate Umesh Nanda

Cheque Bounce, Consumer Court, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Family, High Court, Motor Accident, R.T.I, Recovery

Get Advice
Advocate Pinakin Rajnikant Desai

Advocate Pinakin Rajnikant Desai

Civil, Criminal, Revenue, Property, Family

Get Advice
Advocate Prakhar Gupta

Advocate Prakhar Gupta

Anticipatory Bail,Arbitration,Bankruptcy & Insolvency,Banking & Finance,Breach of Contract,Cheque Bounce,Child Custody,Civil,Consumer Court,Corporate,Criminal,Cyber Crime,Divorce,Documentation,GST,Domestic Violence,Family,High Court,Insurance,Labour & Service,Landlord & Tenant,Media and Entertainment,Medical Negligence,Motor Accident,NCLT,Patent,Property,R.T.I,Recovery,RERA,Startup,Succession Certificate,Supreme Court,Tax,Trademark & Copyright,Wills Trusts,Revenue

Get Advice
Advocate Swamy Gowda E

Advocate Swamy Gowda E

Anticipatory Bail, Breach of Contract, Cheque Bounce, Civil, Consumer Court, Criminal, Cyber Crime, Domestic Violence, Documentation, Divorce, Family, High Court, Immigration, Insurance, Labour & Service, Landlord & Tenant, Medical Negligence, Media and Entertainment, Motor Accident, Muslim Law, GST

Get Advice
Advocate D Rajesh Naik

Advocate D Rajesh Naik

Anticipatory Bail, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Court Marriage, Criminal, Divorce, Documentation, Domestic Violence, Family, High Court, Motor Accident, Succession Certificate, Wills Trusts, Revenue

Get Advice

आपराधिक Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.