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रोड रेज की घटनाओं के लिए क्या सज़ा है?

07-Sep-2026
आपराधिक

Answer By law4u team

भारतीय कानून के तहत रोड रेज यानी सड़क पर गुस्से या झगड़े के दौरान की जाने वाली हिंसा, मारपीट, खतरनाक ड्राइविंग और हत्या जैसी वारदातों से निपटने के लिए बहुत कड़े प्रावधान किए गए हैं। देश में आपराधिक कानूनों में हुए हालिया बदलावों के बाद, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicles Act) के तहत ऐसे मामलों में सजा और जुर्माने को काफी सख्त कर दिया गया है ताकि सड़कों पर इस तरह की गुंडागर्दी और हिंसा को रोका जा सके। जब रोड रेज की कोई घटना होती है, तो पुलिस और अदालतें अपराधी पर कई धाराओं के तहत मामले दर्ज करती हैं, जो इस बात पर निर्भर करता है कि उस घटना में पीड़ित व्यक्ति को कितनी चोट आई है या क्या किसी की जान गई है। यदि रोड रेज की घटना के दौरान किसी व्यक्ति की गैर-इरादतन हत्या (Culpable homicide not amounting to murder) हो जाती है, तो अपराधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) Section 105 के तहत मुकदमा चलाया जाता है। इस गंभीर अपराध के लिए कानून में दोषी को 10 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान है। यदि यह साबित हो जाता है कि आरोपी का इरादा सीधे तौर पर हत्या करने का ही था, तो मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) Section 103 के अंतर्गत हत्या की श्रेणी में आता है, जिसके लिए आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक की सजा मिल सकती है और साथ में भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यदि रोड रेज की घटना में किसी को गंभीर चोट (Grievous hurt) पहुंचती है, जैसे कि हड्डियां टूटना, सिर में गहरी चोट लगना या किसी अंग का स्थायी रूप से खराब हो जाना, तो अपराधी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) Section 117 के तहत कार्रवाई की जाती है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। इसके अलावा, यदि मारपीट में सामान्य चोट (Simple hurt) आती है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) Section 115 लागू होती है, जिसमें 1 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। रोड रेज के मामलों में अक्सर आरोपियों द्वारा पीड़ित की गाड़ी को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जाता है, जिसे आपराधिक तोड़फोड़ (Mischief) माना जाता है। इसके लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) Section 324 के तहत अलग से सजा का प्रावधान है, जिसके तहत 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि आरोपी गाड़ी से किसी को कुचलने की कोशिश करता है या जान जोखिम में डालता है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) Section 125 लागू होती है, जो दूसरों की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित है, और इसमें भी कारावास तथा जुर्माने की सजा मिलती है। आपराधिक मामलों के अलावा, मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicles Act) के प्रावधानों के तहत भी रोड रेज करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होती है। यदि कोई व्यक्ति खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाकर (Dangerous driving) दूसरों की जान जोखिम में डालता है, तो उस पर मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 के तहत भारी जुर्माना लगाया जाता है और उसका ड्राइविंग लाइसेंस भी रद्द या निलंबित किया जा सकता है। इसके साथ ही, यदि कोई ड्राइवर किसी दुर्घटना के बाद मौके से भाग जाता है और घायल व्यक्ति को अस्पताल नहीं पहुंचाता है, तो उस पर मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 134 और संबंधित धाराओं के तहत अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जाती है। यदि आपके साथ कभी रोड रेज की कोई ऐसी घटना होती है, तो आपको सबसे पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए, गाड़ी के दरवाजे बंद रखने चाहिए और भीड़भाड़ वाले इलाके की तरफ गाड़ी बढ़ानी चाहिए। घटना के तुरंत बाद पुलिस कंट्रोल नंबर पर कॉल करके पुलिस को सूचना देनी चाहिए और यदि संभव हो तो आसपास के सीसीटीवी फुटेज या गाड़ी का नंबर नोट कर लेना चाहिए। पुलिस में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए ताकि आरोपी के खिलाफ समय पर कानूनी कार्रवाई शुरू हो सके और अदालत में उसके खिलाफ मजबूत सबूत पेश किए जा सकें।

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